Ramnagar: गर्जिया मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले टीले के सुरक्षात्मक कार्य इस समय तेजी से गतिमान हैं। इसी क्रम में निरीक्षण के लिए पहुंचे मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कई अहम निर्देश जारी किए।
उन्होंने बताया कि गर्जिया मंदिर के सुरक्षात्मक कार्य पर करीब 12 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और यह कार्य मंदिर तथा उसके आसपास के क्षेत्र को बाढ़ और कटाव से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने कहा कि इस परियोजना का कंप्लीशन समय पहले से निर्धारित था, लेकिन कार्य के दौरान क्वांटिटी में बदलाव होने के कारण एस्टीमेट को रिवाइज किया गया है,अब इस कार्य को जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसमें टाइम एक्सटेंशन देना आवश्यक हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य की प्रकृति और बढ़े हुए कार्यभार को देखते हुए समय देना तकनीकी रूप से जरूरी है,
उन्होंने बताया कि मानसून से पहले कार्यों को सुरक्षित स्तर तक पहुंचाने के लिए ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं, मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने कहा कि वर्तमान में कार्य के घंटे बढ़ाकर 8 घंटे से 12 घंटे से अधिक किए जाएं और जरूरत पड़ने पर दो शिफ्टों में कार्य कराया जाए, ताकि मानसून से पहले जरूरी हिस्सों का काम हर हाल में पूरा किया जा सके।
मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने बताया कि मानसून से पहले एचएफएल (हाइएस्ट फ्लड लेवल) तक रिटेनिंग वॉल का निर्माण हर दिशा में पूरा किया जाना अनिवार्य है। इससे न केवल अब तक किए गए कार्य सुरक्षित रहेंगे, बल्कि गर्जिया मंदिर को भी संभावित बाढ़ के खतरे से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इसके बाद प्लाटिंग और अन्य सहायक कार्य मानसून के उपरांत पूरे किए जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि इस समय जो कार्य पानी के अंदर किया जा रहा है, उसे मानसून से पूर्व पूरा करना बेहद जरूरी है।
सभी स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए और निर्माण सामग्री एवं तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन हो।
मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने जानकारी दी कि गर्जिया मंदिर के सुरक्षात्मक कार्य का प्रथम चरण पहले ही दो वर्ष में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, उस चरण में टीले की सुरक्षा के लिए चैनलिंग, शॉर्ट किट और अन्य संरचनात्मक उपाय किए गए थे, जो वर्तमान में प्रभावी रूप से कार्य कर रहे हैं,
उन्होंने बताया कि इस वर्ष परियोजना का सेकंड फेज चल रहा है, इस चरण में नदी की ओर से हो रहे कटाव, नीचे की ओर स्लाइड हो रहे हिस्सों और ढीले हो रहे ब्लॉक्स को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मानसून से पहले हाई फ्लड लेवल तक सुरक्षा कार्य पूरा करना विभाग की प्राथमिकता है और इसके लिए स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं, मुख्य अभियंता ने भरोसा दिलाया कि सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं, ताकि गर्जिया मंदिर और उसका टीला भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रह सके।
गौरतलब है कि 2010 की बाढ़ के बाद गर्जिया मंदिर के टीले में गहरी दरारें आने लगी थी। ये दरारें समय के साथ बढ़ती गईं, जिससे मंदिर की संरचना को खतरा उत्पन्न हो गया था.
इसके साथ ही हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठने लगे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने लगातार शासन को टीले की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा। इसी का परिणाम है कि मई 2024 में पहले चरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. वही इस समय दूसरे फेज का कार्य गतिमान है।
