Ayodhya: हिन्दी दिवस पर अयोध्या में संगोष्ठी, सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन;
“वैश्विक मजबूरियाँ और आवश्यकताएँ ही हिन्दी को विश्व की संपर्क भाषा बनाएंगी। मातृभाषा से ही हमारे देश की अस्मिता की पहचान है। हिन्दी के बिना संपूर्ण एवं समृद्ध राष्ट्र की कल्पना अधूरी है।” यह विचार अपर आयुक्त प्रशासन, अयोध्या श्रीमान अजय कांत सैनी ने व्यक्त किए। वह हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वैदिक रामायण एवं शोध संस्थान (तुलसी स्मारक भवन), अयोध्या में आयोजित संगोष्ठी, सम्मान समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम का आयोजन हिन्दी प्रचार-प्रसार सेवा संस्थान के तत्वावधान में किया गया। संगोष्ठी का विषय “वर्तमान परिस्थितियों में राजभाषा हिन्दी” रहा। कार्यक्रम में साहित्यकारों, समाजसेवियों, पत्रकारों, शिक्षाविदों तथा हिन्दी प्रेमियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और हिन्दी के वर्तमान स्वरूप, उसकी उपयोगिता तथा वैश्विक स्तर पर उसकी संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए।
हिन्दी देश की अस्मिता और पहचान- अजय कांत सैनी
मुख्य अतिथि अजय कांत सैनी ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ी हुई भाषा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिन्दी के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों के बीच हिन्दी के विस्तार की अपार संभावनाएँ भी मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर हिन्दी की उपयोगिता और बढ़ेगी। दुनिया के विभिन्न देशों में हिन्दी को समझने और सीखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वैश्विक आवश्यकताएँ और परिस्थितियाँ हिन्दी को विश्व की संपर्क भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
उन्होंने कहा कि हिन्दी के बिना एक संपूर्ण, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र की कल्पना अधूरी है। देश की आत्मा और अस्मिता को समझने के लिए अपनी भाषा और संस्कृति को समझना आवश्यक है।
हिन्दी से ही देश का समग्र विकास संभव : ज्वाला प्रसाद यादव
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नगर सहायक आयुक्त ज्वाला प्रसाद यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी का विधिवत उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिन्दी से ही देश का समग्र विकास संभव है। हिन्दी के बिना देश की पहचान अधूरी है और देश की अस्मिता की पहचान हिन्दी से ही होती है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हिन्दी को देश की राष्ट्रभाषा घोषित किए जाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएँ। उन्होंने हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए तेज हो अभियान
भाजपा युवा नेता परमानंद मिश्रा तथा मंडल अध्यक्ष मुकेश तिवारी ने कहा कि वर्तमान सरकार हिन्दी को विशेष महत्व दे रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा घोषित किए जाने से देश में विकास की प्रक्रिया को और गति मिल सकती है। दोनों वक्ताओं ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए सामाजिक स्तर पर व्यापक अभियान चलाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए समाजसेवी एवं मित्र मंच के प्रमुख शरद पाठक “बाबा” ने कहा कि हिन्दी के बिना देश की ठोस पहचान बन पाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि समृद्ध और सशक्त भारत की परिकल्पना तभी पूर्ण होगी, जब देश की अपनी भाषा को उचित सम्मान और स्थान मिले।
समाजसेवियों से महाअभियान चलाने का आह्वान
समाजसेवी सुरेश यादव ने कहा कि समाजसेवियों को एकजुट होकर हिन्दी के लिए महाअभियान चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की मुहिम को जन-जन तक पहुँचाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह “वत्स” ने कहा कि हिन्दी के राष्ट्रभाषा बने बिना भारत की अभिव्यक्ति अधूरी है। वहीं संस्थान के संरक्षक मंडल सदस्य एवं ‘साहित्य सम्राट’ पत्रिका के सह-संपादक राम केर सिंह ने कहा कि हिन्दी को पूर्ण रूप से आत्मसात किए बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।
जनमोर्चा के वरिष्ठ पत्रकार सूर्य नारायण सिंह ने कहा कि हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए हम सभी को एक परिवार की तरह मिलकर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करना होगा।
हिन्दी भवन की स्थापना की उठी मांग
समारोह का संचालन करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सम्राट अशोक मौर्य ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने अयोध्या में हिन्दी की गतिविधियों को और अधिक गति देने के लिए हिन्दी भवन की स्थापना की विशेष आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या जैसी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी में हिन्दी के लिए एक समर्पित भवन की स्थापना होने से साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं भाषायी गतिविधियों को स्थायी मंच मिलेगा। साथ ही हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की मुहिम को भी इससे विशेष बल प्राप्त होगा।
कवियों ने काव्य पाठ से बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। सुप्रसिद्ध कवि शैलेन्द्र पांडेय “मासूम” के नेतृत्व में कवियों ने अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में वंदना सिंह, अंतिमा तिवारी, मधु उपाध्याय, संतोष सिंह, कोमल कर्कश, सुनीता पाठक, विश्व विजय प्रताप सिंह एवं लक्ष्मी पांडेय सहित अन्य कवि शामिल रहे। कवियों की प्रस्तुतियों पर उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक तालियों के साथ उनका स्वागत किया।
सैकड़ों साहित्य प्रेमियों और उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान
समारोह का एक प्रमुख आकर्षण सम्मान समारोह रहा। समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लगभग सैकड़ों साहित्य प्रेमियों, समाजसेवियों एवं अन्य विशिष्ट व्यक्तियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मानित व्यक्तियों को प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान किए गए। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। आयोजकों ने कहा कि ऐसे सम्मान समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में आगे आने की प्रेरणा देते हैं।
कई प्रमुख साहित्यकार और समाजसेवी रहे मौजूद
समारोह को संबोधित करने वालों में संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विंध्यवासिनी शरण पांडिया, वरिष्ठ समाजसेवी सावित्री मिश्रा, ओमप्रकाश सोनी, आचार्य स्कंद दास, सुमित्रानंदन यादव, प्रिया श्रीवास्तव, सरोज यादव, दीपचंद राही, मीना सिंह, लाल मनीष प्रताप सिंह, डॉ. चंद्रगुप्त मौर्य, उर्मिला मौर्य, आचार्य शशि मौर्य, डॉ. सम्राट श्री कृष्ण मन मोहन मौर्य, अनामिका सम्राट, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मौर्य, शशिकला मौर्य, बृजेश सेन, रेनू गुप्ता, नरेंद्र पाठक, साध्वी मनीषा पांडेय एवं नीलम सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे।
समारोह में साहित्य एवं समाज से जुड़े प्रमुख लोगों में अधिवक्ता अशोक पांडेय, संतोष कुमार वर्मा, डॉ. अनुराधा मौर्य, संजय यादव, सी.ए. चक्रवर्ती मौर्य, सिद्धार्थ श्रीवास्तव, आलोक निगम, संतोष तिवारी, माधव राज सिंह, अजय श्रीवास्तव “अज्जू”, बलराम मौर्य, डॉ. एस.पी. द्विवेदी, डॉ. सोनी शर्मा, अनिरुद्ध प्रसाद शुक्ला, रागिनी सिंह, मुजामिल फिदा हुसैन एवं रूबे प्रताप मौर्य समेत बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने हिन्दी के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा उसे जन-जन की भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी का भविष्य केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन में हिन्दी के प्रयोग से ही इसे और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि हिन्दी को आधुनिक तकनीक, शिक्षा, साहित्य, प्रशासन और डिजिटल माध्यमों से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। साथ ही अयोध्या को हिन्दी की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता बताई गई।
हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, उसके व्यापक प्रचार-प्रसार तथा हिन्दी को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के सामूहिक संकल्प का महत्वपूर्ण अवसर बना।
